Archive for માર્ચ, 2017

માર્ચ 10, 2017

Life’s First Poem


लम्हा……..

वक़्तसे गीरा एक लम्हा जो तुम्हारे साथ था,

वोही तुम थी वोही मैं था

वहा ऑफिस की बाते करते थे,

यहाँ जिंदगी की बाते करते रहे,

मैं बोलता रहा तुम सुनती रही

क्या कहना था  क्या कह दिया मालूम नहीं

कुछ भूल गया, कुछ बोल गया

घंटो का वक़्त ऐसे बिता जैसे एक छोटा सा लम्हा बिता

अचानक वक़्त को हुआ एह्सास बिछड गया है एक लम्हा

जाने वक़्तसे फिर कब वो लम्हा गिरेगा

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